स्वाइन फ्लू

YUVA SHAKTI BANARAS/ March 5, 2015/ Ayurvigyan/

स्वाइन फ्लूः लक्षण, रोकथाम और बचाव

 

स्वाइन फ्लूः लक्षण, रोकथाम और बचाव

स्वाइन फ्लू दरअसल एक संक्रामक उत्परिवर्ती वायरस है, जिसका संक्रमण मनुष्यों में आरंभ हो गया है और इसने 21 वीं सदी की महामारी का रूप ले लिया है। स्वाइन फ्लू या H1N1 इन्फ्लूएंजा दुनिया भर में तेजी से फैलने के बाद अब भारत के दरवाजे पर अपनी भयावह दस्तक दे रहा है। कहतें अपने दुश्मन के बारे में जानकारी हासिल करना उसे जीतने की ओर पहला कदम है।

लिहाजा भारत में स्वाइन फ्लू के बारे में जानकारी हासिल करके कम से कम हम उसकी की रोकथाम तो कर ही सकते हैं। यहां हम आपको इस फ्लू से जुड़ी कुछ अहम जानकारी देने जा रहे हैं।

स्वाइन फ्लू क्या है ?

H1N1 इन्फ्ल्यूएंजा या स्वाइन फ्लू दरअसल चार वायरस के संयोजन के कारण होता है। आम तौर पर इस वायरस के वाहक सूअर होते हैं। यही वजह है कि मीडिया ने इसे स्वाइन फ्लू यानी कि ‘सुअर फ्लू’ का नाम दे डाला। अब तक यह जानवरों के लिए घातक नहीं था और न ही कभी इसने इंसानों को प्रभावित किया था। लेकिन जब से इस विषाणु का उत्परिवर्तन हुआ है, इस फ्लू ने महामारी के रूप धारण कर लिया है, क्योंकि यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैल रहा है। जोखिम का विषय यह है कि एक नया वायरस स्ट्रीम बन जाने के कारण कोई भी इससे अप्रभावित नहीं है। लिहाजा प्रत्येक व्यक्ति इस संक्रमण के प्रति संवेदनशील है।

क्या होता है अगर सही समय पर नहीं मिला इलाज

लक्षण

हालांकि इसके लक्षण एक सामान्य फ्लू के समान हैं, मगर लापरवाही बरतने पर वे गंभीर हो सकते हैं। आम तौर पर इन लक्षणों के प्रति सचेत रहने की जरूरत है।

* बुखार

* खाँसी

* सिरदर्द

* कमजोरी और थकान

* मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द

* गले में ख़राश * नाक बहना

बचाव और बीमारी की रोकथाम के उपाय

खांसी अथवा छींक के समय अपने चेहरे को टिश्यू पेपर से ढककर रखें।

टिश्यू पेपर को सही तरीके से फेंके अथवा नष्ट कर दें।

अपने हाथों को किसी हैंड सैनीटाइजर द्वारा नियमित साफ करें।

अपने आसपास हमेशा सफाई रखें।

कैसे पता करें कि आपको स्वाइन फ्लू है या साधारण फ्लू

चेहरे पर मास्क को बचाव का एक तरीका माना जा रहा है, मगर वास्तव में यह कितना प्रभावी है इस बारे में किसी रिसर्च के जरिए कोई पक्के नतीजे सामने नहीं आए हैं।

देश के कई राज्यों में एच1एन1 वायरस से मरने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। मौत का खौफ ही है, जिसके चलते थोड़ा सा बुखाार होते ही लोग सीधे डॉक्टर के पास जा रहे हैं? यह सवाल लेकर कि कहीं उन्हें स्वाइन फ्लू तो नहीं! खैर अच्छा भी है, सावधानी तो बरतनी चाहिये। लेकिन फिर भी इस लेख को पढ़ने के बाद आप साधारण फ्लू और स्वाइन फ्लू में फर्क समझ लेंगे।

कैसे पता करें कि आपको स्वाइन फ्लू है या साधारण फ्लू?

 

साधारण फ्लू लगने पर सबसे पहले कमर व पीठ में दर्द होता है, फिर हलका बुखार, फिर जुकाम, खांसी, उसके बाद बदन दर्द होता है। नाक भी बहने लगती है। छींकें भी आती हैं।

वहीं जब कोई इंसान स्वाइन फ्लू की चपेट में आता है तब सबसे पहले उसे तेज बुखार आता है। खांसी, सिर दर्द, बदन दर्द, गला बैठ जाता है। बेचैनी होती रहती है, डायरिया जैसा होने लगता है और उलटी-दस्त शुरू हो जाते हैं। सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। हाफ ब्रीदिंग यानी सांस आधी होने लगती है। छोटे बच्चे खाना खाना छोड़ देते हैं, बड़ों को भूख लगना बंद हो जाती है।

आपको क्या करना चाहिए?

यदि आपको फ्लू के लक्षण महसूस हो रहे हैं, भले ही आपने हाल में कोई यात्रा की हो या नहीं, तुरंत डाक्टर के पास जाएं। यदि टेस्ट रिपोर्ट पॉजीटिव आती है तो घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि फ्लू का एंटीवारयल ड्रग टैमीफ्लू के जरिए इलाज किया जा सकता है।

इस बारे में आपको अपनी सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय के दावों पर यकीन करना चाहिए। भारत ने पहले ही एहतियात के तौर पर टैमीफ्लू जो कि Oseltamivir के नाम से भी जाना जाता है, स्टाक रख लिया है।

अगर मीडिया से जारी उन रिपोर्ट्स ने आपको चिंता में डाल दिया है जिनमें बताया जा रहा है कि भारत में वायरल ड्रग्स अंतरराष्ट्रीय सिफारिश के स्तर से नीचे हैं आपको यह जानना चाहिए कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सिफारिश का मतलब देश की दस प्रतिशत आबादी के लिए पर्याप्त दवाओं के स्टाक से है।

स्वाइन फ्लू से जुड़ी वो बातें जो आपको जरूर मालूम होनी चाहिये

सीधे मौत के दरवाजे पर लाकर खड़ा कर देने वाला स्वाइन फ्लू फिर से वापस आ गया है। देश के सभी राज्यों से स्वाइन फ्लू से बीमार होने के मामले तेजी से आ रहे हैं यही नहीं फ्लू में मौजूद एच1एन1 वायरस से होने वाली मौतों में भी इजाफा हो रहा है। तो ऐसे में हम आपको सावधान करने जा रहे हैं। क्योंकि अगर आप लोगों के साथ उठ-बैठ रहे हैं, बस, ट्रेन, आदि में सफर कर रहे हैं, अगर आपके बच्चे स्कूल जा रहे हैं, तो आप या परिवार के सदस्य इस वायरस की चपेट में आसानी से आ सकते हैं।

स्वाइन इंफ्लुएंज़ा, इसे पिग इंफ्लुएंज़ा, स्वाइन फ्लू, होग फ्लू, पिग फ्लू या एच1एन1 वायरस भी कहा जाता है। यह तमाम प्रकार के स्वाइन इंफ्लुएंज़ा वायरसों में से किसी भी एक वायरस से फैल सकता है।

इंसानों को होने वाले सामान्य फ्लू वायरस या बर्ड फ्लू के वायरस की चपेट में जब सुअर आता है, तब सुअर के शरीर के अंदर एच1एन1 वायरस का जन्म होता है। जब उस बीमार सुअर की चपेट में कोई इंसान आता है, तब उसे स्वाइन फ्लू हो जाता है। और फिर जब उस बीमार व्यक्त‍ि का इलाज अगर सही से नहीं हुआ और उसके संपर्क में अन्य लोग आये, तो उन लोगों तक भी यह वायरस फैल जाता है।

यह वायर बहुत तेज गति से फैलता है। 2009 में एच1एन1 पूरी दुनिया में फैला था, तब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे महामारी घोष‍ित किया था।

कैसे फैलता है यह वायरस?

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि यह वायरस सुअर से आता है। अगर आप यह सोच रहे हैं कि आप तो कभी सुअर के करीब तक नहीं जाते इसलिये आप सुरक्ष‍ित हैं, तो आप गलत हैं। क्योंकि यह वायरस अब इंसानों में फैल चुका है। भारत में अध‍िकांश लोग बुखार आने के तीन दिन तक इंतजार करते हैं। यह देखते हैं कि साधारण पैरासिटामोल से बुखार उतर रहा है या नहीं, उसके बाद कोई एंटीबायोटिक दवा ले लेते हैं, वो भी डॉक्टर से बिना सलाह लिये।

ऐसे लोग बीमारी की हालत में भी अपने परिवार के बेहद करीब रहते हैं, क्योंकि उन्हें पता नहीं होता है कि उन्हें साधारण फ्लू है या स्वाइन फ्लू। और अगर दुर्भायवश स्वाइन फ्लू है और वो उसी बस में यात्रा कर रहे हैं, जिसमें आप सवार हैं, तो आप तक उस वायरस के पहुंचने की प्रबलता बहुत ज्यादा है।